Posts

सरकार का “तर्क” कोई “चेतावनी” तो नहीं?

तेल में लगी आग,आसमान छूती तेल की कीमतें,अबतक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंचे पैट्रोल और डीज़ल के दाम कुछ इसी तरह की लाइनें आपको टीवी,अखबार और वेबसाइट में देखने को मिल रही होंगी। पेट्रोल पंप की मशीनों में लगे प्राइज़ मीटर की रोज़ बढ़ती रिडिंग भी ये ही बताती है कि आज आपकी जेब पर और ज़्यादा बोझ बढ़ेगा। इतना ही नहीं अब तो सरकार ने भी इसपर हाथ खड़े कर लिए हैं। हाल ही में   केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने ये कहते हुए कि सरकार के हाथ में कुछ नही है, इसके पीछे कुछ मुख्य कारण बताए जिसमें से एक कारण है अमरीका की तरफ से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध। क्योंकि सऊदी अरब , इराक़ , नाइजीरिया और वेनेज़ुएला के आलावा भारत में क़रीब 12% कच्चा तेल सीधे ईरान से आता है और ये बात भी सही है कि ईरान पर लगाए गए अमरिकी प्रतिबंधों के बाद से भारत पर अमरीका का दबाव है कि वो ईरान से तेल आयात बंद कर दे। तो अगर सरकार के इस तर्क के हिसाब से देखा जाए तो क्या आने वाले समय में भारत में कच्चे तेल की और भी कमी हो सकती है ? जिसके चलते दाम और भी बढ़ सकते हैं ? इसके लिए थोड़ा पीछे चलना पड़ेगा। दरअसल इसी साल अमरीका...

2019 में भाजपा का गणित (अल्पसंख्यक+दलित+आरक्षण=ध्रुविकरण)

हमारे देश में आरक्षण को लेकर हमेशा ही एक बहस छिड़ी रहती है। कुछ लोग इसके पक्ष में बोलते हैं और साथ ही इसमें कुछ बदलाव की बात भी करते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे योग्यता के साथ खिलवाड़ करने का हथियार बताते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों के लिए अल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण का मुद्दा उठा कर एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी। सीएम योगी ने कहा “ कि जब बीएचयू दलितों को आरक्षण दे सकता है तो फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? ” यहां सवाल ये है कि क्या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में अल्पसंख्यकों के अलावा और किसी वर्ग को आरक्षण मिल सकता है और अगर हां तो फिर क्या होगा ? पहले अगर इसे संवैधानिक तरीके से समझें तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 कहता है कि भाषाई अल्पसंख्यक हो या धार्मिक अल्पसंख्यक उनको अपने शिक्षण संस्थान बनाने और उनको चलाने का अधिकार होगा। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को मानते हुए कई अहम फैसले सुनाए है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है 2005 में संविधान में किया गया 93वें ...

जम्मू-कश्मीर में "रेनकोट" पहन कर नहाई भाजपा !

“ पिछले दिनों जम्मू-कश्मीर में जो घटनाएं हुई हैं, उन पर तमाम इनपुट लेने के बाद प्रधानमंत्री मोदी और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से परामर्श लेने के बाद आज हमने निर्णय लिया है कि गठबंधन सरकार में चलना संभव नहीं होगा ” । भाजपा के राष्ट्रीय सचिव राम माधव की इन दो लाइनों ने पीडीपी की ईद फीकी कर दी। देखा जाए तो ये सबसे दिलचस्प राजनीतिक मेल था जिसकी शुरुआत साल 2014 के आखिर में हुई थी और ये वही राम माधव हैं जिन्होनें इस गठबंधन को कराने में एक अहम भूमिका निभाई थी। ये गठबंधन एक साझा एजेंडा पर चलना था मगर एजेंडा तो छोड़िए दोनों दल ही साथ नहीं चल पाए और शुरु से ही काफी मुद्दे जैसे पाकिस्तान से वार्ता,पात्थरबाजी,धारा 370 और 35A और कठुआ गैंग रेप पर दोनों पार्टियों में खींचतान चलती ही रही। अगर इस बेमेल सरकार के कार्यकाल को देखें तो वो भी बहुत अच्छा नहीं दिखता है। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में साल 2016 में आतंकवाद की 322 घटनाएं हुईं और 2017 में 342 हिंसक घटनाएं हुईं। वहीं अगर सुरक्षाकर्मी और आम नागरिकों के मौत की बात करें तो 2016 में 82 सुरक्षाकर्मी , 15 आम ...

जाति कभी न जाती...

1 जनवरी की भीमा कोरेगांव लड़ाई...चाहे सन् 1818 की हो या फिर 2018 की...लड़ाई तब भी जात-पात की थी और आज भी जात-पात की है... शुरुआत करते हैं इतिहास से जब निचली जाति के लोगों का नगर में प्रवेश करना किसी चुनौती से कम नहीं था...सोचिए कि आप को कहा जाए कि जब आप इलाके में घुसे तो आपकी पीठ पर एक झाड़ू लटकी हो जो धरती को छूए जिससे आपके पैर जहां भी पड़े उस झाड़ू से वो हिस्सा साफ होता चले....आप पैर में चप्पल-जूते कुछ नहीं पहन सकते...आपको पानी के लिए अपना कुआ अलग खोदना होगा...आपके मुंह से निकला धूक कहीं ज़मीन को अपवित्र न कर दे इसलिए आप एक मटका अपने गले में डाल कर चले और उसमें ही आप धूकें...यह था हमारे यहां अछूत कहे जाने वाले लोगों का हाल.... महाराष्ट्र में हुए हाल के दंगों का करण भी जातीय मतभेद ही है...अब से 200 साल पहले जब ब्राह्मणों ने दलितों पर ये छुआछूत का फरमान जारी किया तो उन लोगों ने इसका विरोध किया लेकिन ऊंची जाति ( ब्राह्मणों ) वालों के न मानने पर दलित कहे जाने वाली महार जाती के लोगों ने अंग्रेजों का दामन थाम लिया...अंग्रेजों को तो बैठे बिठाए हथियार मिल गया था...और अंग्रेजों न...

UN में अमरीका और इसराइल के खिलाफ क्यों गया भारत...?

येरूशलम को इसराइल की राजधानी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है...यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा ने पारित कर दिया है...जिसके लिए वोटिंग हुई जिसमें भारत समेत 128 देशों ने इस प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया और अमरीका समेत 9 देशों ने इसके विरोध में वोट किया...35 देश मतदान में शामिल नहीं हुए... आखिर क्या विवाद है इसराइल और येरूशलम का ?....1967 के युद्ध में विजय होने के बाद इसराइल ने पूर्वी यरूशलम पर क़ब्ज़ा कर लिया था...इससे पहले यह जॉर्डन के नियंत्रण में था. .. अब इसराइल अविभाजित यरूशलम को ही अपनी राजधानी मानता है...वहीं फ़लस्तीनी अपने प्रस्तावित राष्ट्र की राजधानी पूर्वी यरूशलम को मानते हैं...मगर यरूशलम पर इसराइल के दावे को कभी अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली है...और वो ही एक बार फिर हुआ... अब बात आती है कि इसके लिए वोटिंग क्यों हुई ? ...इसका कारण है डोनल्ड ट्रंप जिन्होंनें न सिर्फ येरूशलम को इसराइल की राजधानी का दर्जा दिया बल्की इसराइल में अमरीकी दूतावास को येरूशलम में शिफ्ट करने की बात भी कही...और जिसके बाद से ही यह विवाद फिर से सुर्खियों में आ गया... तुर्की और यमन ने इसके ख...

कांग्रेस मुक्त भारत-सपना या हक़ीक़त?

भले ही आप गुजरात चुनाव में व्यस्त हों...नेताओं के भाषण से लेकर ट्वीट तक...वोट बैंक की राजनीति से लेकर सीडी कांड तक सब कुछ हो रहा है। अब कुछ छोटी सी बातों पर आपका ध्यान ले जाना चाहेंगे हो सकता है इन बातों से आज की राजनीति में चल रही उथल-पुथल पर कोई फर्क ना पड़े लेकिन बात कितनी भी छोटी क्यों ना हो उसे भी नकारा नहीं जा सकता। “ कांग्रेस मुक्त भारत ” इस लाइन से कुछ तो याद आया होगा...जी हां यह भाजपा का ही संकल्प था जो उसने लोकसभा चुनाव में लिया था। आज भाजपा के इसी संकल्प के बारे में बात करते है और इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब भी खोजतें हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मोदी और भाजपा दोनों को ही अभी टक्कर देना कोई खेल है मगर यह भी नहीं कह सकते की कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की हो...इसके बहुत से उदाहरण भी है..जैसे की... पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणी अकाली दल और भाजपा की सरकार को 2017 विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। पंजाब में 117 विधानसभा सीट है और 2012 में अकेली भाजपा ने सिर्फ 12 सीटों पर जीत हासिल की और कांग्रेस को 46 सीटें मिली....

हमारा संकल्प-पारदर्शी सरकार, जवाबदेह सरकार?

जब देश लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग रहा था...जब हर एक नेता अपनी पार्टी और खुद को जनता का सेवक बता रहा था...उन सब के बीच में एक नेता जो इन सब की तरह ही अपनी पार्टी या यूं कहें कि खुद को लेकर चुनाव की तैयारी कर जनता के बीच में खूब छाया हुआ था...जिसके प्रभाव को नाम दिया गया “ लहर ” ...मोदी की लहर...वो लहर जिसमें झाड़,पत्ते सब पार लग गए...और जीत गए...इस लेख का जो शीर्षक है उसमें मेरा कुछ भी नहीं है बस इस ‘ ?’ चिन्ह के अलावा वो इसलिए कि ऊपर की पूरी लाइन जो कि “ हमारा संकल्प - पारदर्शी सरकार , जवाबदेह सरकार ” है वो भाजपा के घोषणापत्र से चेपी है जो की 2014 लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र के आखिर में छपी थी। अब थोड़ा 3 साल पीछे चलते है याद कीजिए चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर थी और उस समय भाजपा या यूं कहें कि मोदी जी ने जो अपनी हर रैली में डगमगाती अर्थव्यवस्था,भ्रष्टाचार,विकास और ना जानें बहुत मुद्दो पर लोगो का दिल के साथ-साथ चुनाव भी जीत लिया था...देखा जाए तो घोषणापत्र को किसी भी पार्टी के वादों की पोटली कहना ग़लत नहीं होगा क्योंकी उसमें जो लिखा होता है वो पार्टी के वो वादे होते है जो वह जनता...