UN में अमरीका और इसराइल के खिलाफ क्यों गया भारत...?
येरूशलम को इसराइल
की राजधानी का दर्जा नहीं दिया जा सकता है...यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र महासभा
ने पारित कर दिया है...जिसके लिए वोटिंग हुई जिसमें भारत समेत 128 देशों ने इस
प्रस्ताव के समर्थन में वोट किया और अमरीका समेत 9 देशों ने इसके विरोध में वोट किया...35
देश मतदान में शामिल नहीं हुए...
आखिर क्या विवाद है
इसराइल और येरूशलम का?....1967 के युद्ध में विजय होने के बाद इसराइल
ने पूर्वी यरूशलम पर क़ब्ज़ा कर लिया था...इससे पहले यह जॉर्डन के नियंत्रण में
था...अब इसराइल अविभाजित यरूशलम को ही अपनी राजधानी
मानता है...वहीं फ़लस्तीनी अपने प्रस्तावित राष्ट्र की राजधानी पूर्वी यरूशलम को
मानते हैं...मगर यरूशलम पर इसराइल के दावे को कभी अंतरराष्ट्रीय मान्यता नहीं मिली
है...और वो ही एक बार फिर हुआ...
अब बात आती है कि
इसके लिए वोटिंग क्यों हुई?...इसका कारण है डोनल्ड ट्रंप जिन्होंनें न सिर्फ
येरूशलम को इसराइल की राजधानी का दर्जा दिया बल्की इसराइल में अमरीकी दूतावास को
येरूशलम में शिफ्ट करने की बात भी कही...और जिसके बाद से ही यह विवाद फिर से
सुर्खियों में आ गया... तुर्की और यमन ने इसके
खिलाफ एक प्रस्ताव रखा जिसके लिए वोटिंग हुई...
अब
सोचने वाली बात है कि भारत जो अमरीका और इसराइल दोनों के ही काफी करीब है...तो अब
भारत ने दोनों ही देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अकेला क्यों छोड़ दिया...
पढ़ने
के बाद बहुत से संभावित कारण सामने आए...जिसमें सबसे पहला है कि अपनी
अंतरराष्ट्रीय नीती के अनुसार भारत फ्लस्तीन और इसराइल में बराबर बैलेंस बनाकर
चलता है और यहां भी वो बहुमत के साथ ही गया...वो बात अलग हैं की भारत और इसराइल की
दोस्ती काफी अच्छी है...
दूसरा
कारण यह है की भारत के लिए इस प्रस्ताव का समर्थन करना कोई नई बात नहीं थी क्योंकि
पिछले 50 सालों में भारत ने इसे कई बार समर्थन दिया है...इसलिए अब भी भारत ने अपना
रुख नहीं बदला...
बात
करते है तीसरे कारण की जिसमें भारत का खुद का भी स्वार्थ है...वो है कश्मीर मुद्दा
जिसके लिए यह बहुत ज़रूरी है कि भारत संयुक्त राष्ट्र(UN) में अपने अंतरराष्ट्रीय नियम पर ही
चले जिसपर वो चलता आ रहा है और चला भी...
देखा
जाए तो भारत-पाक के बीच कश्मीर मुद्दा कुछ-कुछ इसराइल और फ्लस्तीन के बीच येरूशलम के मुद्दे जैसा ही है...और हो सकता है की भविष्य में कभी UN में कश्मीर की किसी चर्चा पर भारत को अपने
इस फैसला का फायदा भी मिले और वो इसका उदाहरण दे कर अपने पक्ष को और बल दे सके...कि जब युध्द में कब्ज़ाए येरूशलम को इसराइल की राजधानी का दर्जा नहीं दिया जा सकता तो फिर POK समेत पूरे कश्मीर पर पाकिस्तान का हक़ कैसे?...अब देखना होगा की अमरीका और इसराइल का भारत पर क्या रुख रहेगा...
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