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कांग्रेस मुक्त भारत-सपना या हक़ीक़त?

भले ही आप गुजरात चुनाव में व्यस्त हों...नेताओं के भाषण से लेकर ट्वीट तक...वोट बैंक की राजनीति से लेकर सीडी कांड तक सब कुछ हो रहा है। अब कुछ छोटी सी बातों पर आपका ध्यान ले जाना चाहेंगे हो सकता है इन बातों से आज की राजनीति में चल रही उथल-पुथल पर कोई फर्क ना पड़े लेकिन बात कितनी भी छोटी क्यों ना हो उसे भी नकारा नहीं जा सकता। “ कांग्रेस मुक्त भारत ” इस लाइन से कुछ तो याद आया होगा...जी हां यह भाजपा का ही संकल्प था जो उसने लोकसभा चुनाव में लिया था। आज भाजपा के इसी संकल्प के बारे में बात करते है और इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब भी खोजतें हैं। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि मोदी और भाजपा दोनों को ही अभी टक्कर देना कोई खेल है मगर यह भी नहीं कह सकते की कांग्रेस मुक्त भारत बनाने में भाजपा ने बहुत बड़ी जीत हासिल की हो...इसके बहुत से उदाहरण भी है..जैसे की... पंजाब विधानसभा चुनाव में शिरोमणी अकाली दल और भाजपा की सरकार को 2017 विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा। पंजाब में 117 विधानसभा सीट है और 2012 में अकेली भाजपा ने सिर्फ 12 सीटों पर जीत हासिल की और कांग्रेस को 46 सीटें मिली....

हमारा संकल्प-पारदर्शी सरकार, जवाबदेह सरकार?

जब देश लोकसभा चुनाव की तैयारी में लग रहा था...जब हर एक नेता अपनी पार्टी और खुद को जनता का सेवक बता रहा था...उन सब के बीच में एक नेता जो इन सब की तरह ही अपनी पार्टी या यूं कहें कि खुद को लेकर चुनाव की तैयारी कर जनता के बीच में खूब छाया हुआ था...जिसके प्रभाव को नाम दिया गया “ लहर ” ...मोदी की लहर...वो लहर जिसमें झाड़,पत्ते सब पार लग गए...और जीत गए...इस लेख का जो शीर्षक है उसमें मेरा कुछ भी नहीं है बस इस ‘ ?’ चिन्ह के अलावा वो इसलिए कि ऊपर की पूरी लाइन जो कि “ हमारा संकल्प - पारदर्शी सरकार , जवाबदेह सरकार ” है वो भाजपा के घोषणापत्र से चेपी है जो की 2014 लोकसभा चुनाव के घोषणापत्र के आखिर में छपी थी। अब थोड़ा 3 साल पीछे चलते है याद कीजिए चुनावों की सरगर्मी अपने चरम पर थी और उस समय भाजपा या यूं कहें कि मोदी जी ने जो अपनी हर रैली में डगमगाती अर्थव्यवस्था,भ्रष्टाचार,विकास और ना जानें बहुत मुद्दो पर लोगो का दिल के साथ-साथ चुनाव भी जीत लिया था...देखा जाए तो घोषणापत्र को किसी भी पार्टी के वादों की पोटली कहना ग़लत नहीं होगा क्योंकी उसमें जो लिखा होता है वो पार्टी के वो वादे होते है जो वह जनता...

मीडिया से राजनीति...

जब छोटे थे तो सुना करते थे और टीवी में भी कई फिल्मों में देखा की अगर किसी को राजनेता बनना है तो वह लोगों के बीच में जाकर उनकी मदद किया करता था...गांव में कही भी कोई भी किसी भी तरह का मुद्दा हो वो शख्स वहां लोगों का नेतृत्व करने पहुंच ही जाता था...फिर धीरे-धीरे वो कोई पार्टी पकड़ कर चुनाव लड़ता था और जीत भी जाता था...उसके बाद नेता बनने के लिए लोगों ने पैसा...पॉवर...इन सब का इस्तमाल करना शुरू किया...इस तरह के लोग आज भी है...शायद ज्यादा ही होंगे....लेकिन अब नेता बनने के लिए एक नया रास्ता और निकल चुका है...जिसमें ना आपको लोगों के बीच जानें की जरूरत है ना कुछ ज्यादा पैसा लगाने की...वो है मीडिया ...इसमें कोई नई बात नहीं है...अभी जो आज मीडिया का हाल हो चला है उस पर तो अगर बात करने बैठे तो ना जानें कितना समय निकल जाए...लेकिन एक चीज़ जो मैनें खुद से महसूस की है वही आप लोगों को बता रहा हूं...दिन भर में काफी लोगों से सुनने को मिल ही जाता है “ कि यार बस इस पार्टी में कोई पद मिल जाए...चुनाव लड़ने का मौका मिल जाए...और जीत जाएं बस फिर कोई दिक्कत नहीं है...मीडिया में क्या रखा है...यहां तो बस पढ़ते-ल...