मीडिया से राजनीति...

जब छोटे थे तो सुना करते थे और टीवी में भी कई फिल्मों में देखा की अगर किसी को राजनेता बनना है तो वह लोगों के बीच में जाकर उनकी मदद किया करता था...गांव में कही भी कोई भी किसी भी तरह का मुद्दा हो वो शख्स वहां लोगों का नेतृत्व करने पहुंच ही जाता था...फिर धीरे-धीरे वो कोई पार्टी पकड़ कर चुनाव लड़ता था और जीत भी जाता था...उसके बाद नेता बनने के लिए लोगों ने पैसा...पॉवर...इन सब का इस्तमाल करना शुरू किया...इस तरह के लोग आज भी है...शायद ज्यादा ही होंगे....लेकिन अब नेता बनने के लिए एक नया रास्ता और निकल चुका है...जिसमें ना आपको लोगों के बीच जानें की जरूरत है ना कुछ ज्यादा पैसा लगाने की...वो है मीडिया...इसमें कोई नई बात नहीं है...अभी जो आज मीडिया का हाल हो चला है उस पर तो अगर बात करने बैठे तो ना जानें कितना समय निकल जाए...लेकिन एक चीज़ जो मैनें खुद से महसूस की है वही आप लोगों को बता रहा हूं...दिन भर में काफी लोगों से सुनने को मिल ही जाता है कि यार बस इस पार्टी में कोई पद मिल जाए...चुनाव लड़ने का मौका मिल जाए...और जीत जाएं बस फिर कोई दिक्कत नहीं है...मीडिया में क्या रखा है...यहां तो बस पढ़ते-लिखते ही मर जाएंगे....इस तरह की बाते आज कल मीडिया में खूब होती है...मैं कोई मीडिया का बहुत बड़ा जानकार नहीं हूं...बस जो रोज सुनता हूं वो ही आपके साथ शेयर कर लिया...ना ही यह कहता हूं की हर कोई मीडिया में ऐसा बोलता है...मगर ऐसी बाते सुनकर मुझ जैसे नए नवेले को बड़ा अजीब लगता है..कि मीडिया किस तरह अपनी ताक़त भूल रहा है...किस तरह अपनें को पार्टी और नेताओँ से कम आंकता है......

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