2019 में भाजपा का गणित (अल्पसंख्यक+दलित+आरक्षण=ध्रुविकरण)
हमारे देश में आरक्षण को लेकर हमेशा ही एक बहस छिड़ी रहती है। कुछ लोग इसके पक्ष में बोलते हैं और साथ ही इसमें कुछ बदलाव की बात भी करते हैं तो वहीं कुछ लोग इसे योग्यता के साथ खिलवाड़ करने का हथियार बताते हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दलितों के लिए अल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण का मुद्दा उठा कर एक बार फिर इस बहस को हवा दे दी। सीएम योगी ने कहा “ कि जब बीएचयू दलितों को आरक्षण दे सकता है तो फिर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिल्लिया इस्लामिया में ऐसा क्यों नहीं हो सकता ? ” यहां सवाल ये है कि क्या अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों में अल्पसंख्यकों के अलावा और किसी वर्ग को आरक्षण मिल सकता है और अगर हां तो फिर क्या होगा ? पहले अगर इसे संवैधानिक तरीके से समझें तो भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 कहता है कि भाषाई अल्पसंख्यक हो या धार्मिक अल्पसंख्यक उनको अपने शिक्षण संस्थान बनाने और उनको चलाने का अधिकार होगा। इतना ही नहीं सुप्रीम कोर्ट ने भी इस बात को मानते हुए कई अहम फैसले सुनाए है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है 2005 में संविधान में किया गया 93वें ...